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तिलहन फसलें आज के समय की एक बड़ी जरूरत-कलेक्टर डॉ.सिद्दकी

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“प्रखरआवाज@न्यूज़”

कलेक्टर डॉ.सिद्दकी एवं सीईओ श्री मिश्रा पहुंचे बरमकेला

बरमकेला स्थित खपरापाली गांव में सरसों की खेती का किया निरीक्षण

सारंगढ़-बिलाईगढ़ न्यूज़/ कलेक्टर डॉ.फरिहा आलम सिद्दकी द्वारा जिले के किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने एवं फसलों के चक्रीकरण हेतु कृषि विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को शासन की योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन करते हुए हितग्राहियों को जमीनी स्तर पर लगातार आवश्यक मार्गदर्शन दिए जा रहा है,इसके साथ ही दलहन-तिलहन फसलों को लेकर किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में कलेक्टर डॉ.फरिहा आलम सिद्दकी एवं रायगढ़ जिला पंचायत सीईओ श्री अबिनाश मिश्रा सरसों की खेती का निरीक्षण करने बरमकेला के खपरापाली गाँव पहुंचे। खपरापाली गाँव में सरसों वृहद कार्यक्रम अंतर्गत 132 एकड़ क्षेत्रफल में सरसों की खेती की जा रही है, सरसों की इस खेती में गाँव के लगभग 65 किसान जुड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि बरमकेला विकासखण्ड में तिलहन एवं दलहन की फसलें प्रमुखता में ली जाती हैं, इसमें मुख्य रूप से सरसों एवं रागी की फसलें ली जाती हैं, साथ ही अभी आने वाले समय में बरमकेला में कुल 200 एकड़ क्षेत्रफल में रागी की फसल लेने की तैयारी की जा रही है। कलेक्टर डॉ.सिद्दकी ने सरसों की फसल के संबंध में कहा कि सरसों की खेती से खाद्य तेल हेतु आत्मनिर्भरता को हासिल किया जा सकता है, साथ ही मिट्टी में नमी बनाए रखते हेतु भी तिलहन फसलें अति आवश्यक हैं, गेहूं व धान की खेती के बजाय तिहलन फसलों की ओर जाना आज के समय की मांग है।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने इस वर्ष की फसल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरसों की पैदावार में पिछले साल की अपेक्षा वृद्धि देखने को मिली है जो निश्चित रूप से आने वाले समय में तिलहन फसलों को लेकर किसानों को प्रोत्साहित करेगा। उक्त निरीक्षण के दौरान बरमकेला जनपद सीईओ श्री नीलाराम पटेल, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ग्राम खपरापाली एवं अन्य विभागीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
एक तिहलन फसल के रूप में सरसों
उत्पादन और क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से देखा जाये तो खाद्य तेल के रूप में प्रयोग होने वाली फसलों में सरसों प्रमुख तिलहन फसलों में से एक हैं। सरसों की फसल कम पानी की दशा में पककर अच्छा मुनाफा देने वाली खेती में से एक है। सरसों के हरे पौधे से लेकर सूखे तने, शाखायें और बीज उपयोग में आते है। इसकी कोमल पत्तियों का साग के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके बीज में 37 से 47 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है। सरसों के तेल के साथ ही उसकी खली और यहां तक कि सरसों की कटाई उपरांत खेत में शेष रह जाने वाली उसकी लकड़ी भी अच्छी कीमत पर बिक्री हो जाती है।

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