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बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा की अनसुनी कहानियां:उन्होंने कहा था- मैं जब चाहूंगा तभी मरूंगा,गोली चलती रही और वो मुस्कुराते रहे

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“प्रखरआवाज@न्यूज़”

न्यूज/ बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा का आज जन्मदिन है अगर वे जीवित होते तो उनकी उम्र 73 साल होती। पूरा छत्तीसगढ़ आज उन्हें याद कर रहा है। उनके कामों को याद कर प्रदेश की जनता,उनकी सराहना करते नहीं थकती है। सलवा जुडूम के प्रणेता महेंद्र कर्मा नक्सलवाद के कट्टर विरोधी थे जो झीरम घाटी नक्सल हमले में ही शहीद हुए। निधन के बाद भी छत्तीसगढ़ के दिग्गज लीडर्स में उनकी गिनती होती है। माओवादियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की वजह से उन्हें उनके क्षेत्र में बस्तर टाइगर के रूप में जाना जाता है। आज महेन्द्र कर्मा के जन्मदिन है। सलवा जुडूम में पूरी रात जनता के साथ भीगते रहे… महेन्द्र कर्मा के करीबी बीजापुर जिले के भैरमगढ़ में रहने वाले अजय सिंह ने अपनी यादें साझा की। उन्होंने प्रेस को बताया कि उनके भाई पोदियाराम कर्मा भैरमगढ़ में जनपद अध्यक्ष थे और उन्हीं के जरिए वे महेन्द्र कर्मा से जुड़े। अजय सिंह ने कहा कि कर्मा का व्यक्तित्व ऐसा था कि हम उनके भक्त और वे हमारे आदर्श हो गए। सलवा जुडूम आंदोलन की एक रात के बारे में उन्होंने बताया, महेन्द्र कर्मा ने भारी बारिश में भी सलवा जुडूम आंदोलन को जारी रखा था। आंदोलन के दौरान कर्मा जी के साथ हम भैरमगढ़ के पास बेचापाल पहुंचे। ये वो जगह थी जहां उस समय फोर्स भी बड़ी मुश्किल से जाती लेकिन यहां सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े 4 से 5 हजार लोग एक साथ थे।

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