“खाद्य सुरक्षा के अधिकारियों ने स्वतंत्रता पर्व पर परोसा बासी नाश्ता”

पानी के लिए तरसते रहे छात्र और गणमान्य जन
सारंगढ़ शहर में नकली खाद्य सामग्री की बिक्री पर आखिर चुप्पी क्यों ?
सारंगढ़ बिलाईगढ़ न्यूज़/ सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में खाद्य विभाग अपनी मनमानी को लेकर ऐसे मदमस्त है की खुद खाद्य सुरक्षा के प्रहरी मिलावटी अधिकारी बन कर रह गए हैं जो अब आम जन चर्चा का विषय बनकर रह गया है। लंबे समय से एक ही जिले में कुर्सी में डेट इन अधिकारियों ने आम जनता के नाक में दम करके रखा है पहले ही राशन दुकानों के कई घोटालों को तिजोरी में बंद करके चुप्पी साधे बैठे ये अधिकारी अब आम जनता के जीवन से भी खिलवाड़ करने में नहीं चुक रहे है।
गौरतलब हो की इन खाद्य अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी का आलम स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर साफ नजर आया। उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि के साथ प्रथम पंक्ति में बैठे वीआईपी गेस्ट को जहां काजू बादाम और स्पेशल नाश्ता परोसा गया तो वहीं भेदभाव करते हुए आम नागरिकों को बासी समोसे और बासी मीठे में संतोष करना पड़ा। कार्यक्रम के बाद भी डब्बे पर नाश्ता इस तरह पड़ा रहा जो पूरी तरह से फेंकने में गया कइयों ने तो नाश्ते के डब्बे को वेटरों को वापस कर दिया जो स्पेशल नाश्ता बांटने के लिए जगदंबा रेस्टोरेंट टीमरलगा से बुलाए गए थे। कई जनप्रतिनिधियों गणमान्य नागरिकों पत्रकारों ने स्वयं जाकर खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल एवं नायक जी को जानकारी भी दी परंतु लंबे समय के अधिकारी हैं उनके साथ इशारा होता है मेरी मर्जी,,,,,,,, उक्त जानकारी के बाद हद तो तब हो गई जब मुख्य अतिथि महोदय का जाना हुआ और खाद्य अधिकारी ने वेटरों को बोला कि सभी पानी को गाड़ी में डाल दो वही छात्र-छात्राओं के मंच में नृत्य व अन्य कार्यक्रम जारी थे जिला कलेक्टर और जिले के तमाम अधिकारी गणमान्य नागरिक मीडिया उक्त कार्यक्रम में सारिक थी कईयों ने जाकर अपनी ढूंढा मगर पानी नहीं था। यहां तक की अधिकारियों के गनमैन सुरक्षा गार्ड भी पानी को तरसते रहे, अंततः कुछ लोगों ने जाकर पुनः खाद्य अधिकारी से गुहार लगाई कि अभी कार्यक्रम चल ही रहा है कम से कम पानी की व्यवस्था तो करो। जी,,,जी करते हुए उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया और किसी तरह दो-तीन छोटे पानी के बोतल लाकर चलते बने।
अधिकारियों का क्या है एक्सक्यूज – जब एक सजग प्रहरी ने उक्त बातों से खाद्य अधिकारियों को अवगत कराया तो उन्होंने बताया की 4:00 बजे से यह सब नाश्ते बना रहे हैं मीठा दब गया होगा समोसा रह गया होगा। तो क्या इतने वर्षों से इसके पूर्व कार्यक्रमों में इस तरह की लापरवाही और शिकायत क्यों नहीं हुई कहीं ना कहीं इन अधिकारियों के लापरवाही खुलकर सामने आई है।
दूसरी ओर राशन दुकानों की बात तो रहने ही दो उस पर शहर में नकली खाद्य सामग्री को खुली छूट देना खाद्य विभाग के साथ-साथ प्रशासन पर भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है?
जिले के संवेदनशील अधिकारियों से निवेदन है कि लोगों की स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें।