
रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने मीसाबंदियों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने मीसाबंदियों को पुनः सम्मान निधि देने का निर्णय लिया है, जिसे कांग्रेस सरकार के दौरान बंद कर दिया गया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
मीसाबंदियों को मिलेगा बकाया भुगतान
आपातकाल के दौरान जेल में रहे मीसाबंदियों को अब सरकार फिर से पेंशन प्रदान करेगी। पांच साल से रुकी हुई सम्मान निधि को एकमुश्त दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत मीसाबंदियों को 10 हजार से 25 हजार रुपये प्रति माह की पेंशन मिलेगी, जो उनकी श्रेणी के आधार पर तय होगी।
विधेयक पारित, भविष्य में नहीं बदलेगा फैसला
सरकार ने इस निर्णय को कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा में विधेयक पारित कर दिया है, जिससे भविष्य में कोई भी सरकार इसे रद्द न कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को सम्मान देने के लिए यह कानून आवश्यक था।
कौन हैं मीसाबंदी?
25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) के तहत हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था। इनमें वे लोग शामिल थे, जो सत्ता के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में मीसा कानून के तहत गिरफ्तार हुए लोगों को मीसाबंदी कहा जाता है।
2008 में हुई थी योजना की शुरुआत
रमन सिंह सरकार ने 2008 में मीसाबंदियों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी, जिसमें उन्हें मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती थी। यह योजना 2019 में कांग्रेस सरकार द्वारा बंद कर दी गई थी, लेकिन अब बीजेपी सरकार ने इसे दोबारा बहाल कर दिया है।
छत्तीसगढ़ में करीब 350 मीसाबंदी
प्रदेश में लगभग 350 लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आगे किसी भी सरकार द्वारा इस पेंशन को रोका न जा सके।
मध्य प्रदेश की तर्ज पर बना कानून
छत्तीसगढ़ सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार के कानून का प्रारूप अपनाते हुए इस योजना को कानूनी जामा पहनाया है। इस फैसले के बाद अब मीसाबंदियों की पेंशन को भविष्य में कोई सरकार बदल नहीं सकेगी।
2019 में बंद हुई थी योजना
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2019 में मीसाबंदियों की पेंशन योजना को बंद कर दिया था। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान बीजेपी ने वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी, तो इस योजना को पुनः शुरू किया जाएगा। अब सरकार ने इस वादे को पूरा कर दिया है।