छत्तीसगढ़सारंगढ़ बिलाईगढ़

अशोक स्कूल में छात्रों के आयुष्मान कार्ड बने और हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

“प्रखरआवाज@न्यूज़”

सीएमएचओ डॉ एफ आर निराला ने दी मौसमी और गंभीर बीमारियों से बचने की सलाह

आज के दौर में अपने स्वास्थ्य का खुद ख्याल रखें – संजय पांडेय जिप अध्यक्ष

सारंगढ़ बिलाईगढ़ न्यूज़/ जिले के संवेदनशील कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एफ आर निराला के द्वारा सारंगढ़ अशोका पब्लिक स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण के साथ स्वास्थ्य संबंधी जानकारीयो से अवगत कराया। उक्त प्रशिक्षण में लगभग 92 से अधिक छात्र-छात्राओं के परीक्षण के साथ आयुष्मान कार्ड बनाए गए, छात्रों का नेत्र परीक्षण के साथ 115 छात्रों का हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया।

सर्वप्रथम संस्था के संचालक राजेश केजरीवाल एवं प्राचार्य जे मिश्रा ने स्कूल के सभाकक्ष में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर में आगंतुक जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय, डॉक्टर एफ आर निराला सीएमएचओ, डॉक्टर सिदार और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का अभिवादन किया।

जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ निराला ने अपने उद्बोधन में बताया कि यदि खून की कमी के बचाव को देखे तो अच्छे संतुलित आहार के साथ आयरन गोली की पूरक आहार लेने से ठीक किया जा सकता है। आयरन की गोली 10 वर्ष से 19 वर्ष के बीच जो नीले रंग की होती है। प्रति मंगलवार को प्रार्थना के बाद खिलाई जाती है। गोली नोडल टीचर्स या कक्षा शिक्षक की उपस्थिति में खिलाई जाती है। ऐसे वर्ष में 52 गोली खानी होती है। इस गोली को खाने समय दूध या दूध का बना हुआ सामान 2 घंटे पहले या बाद में न ले या फिर कैल्शियम की गोली साथ में नहीं खानी चाहिए। इससे आयरन की अवशोषण सही नहीं होती। घर में मिलने वाले भोजन को भी संतुलित आहार जिसमें सभी अवयव प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, विटामिन, खनिज लवण तथा पर्याप्त पानी की मात्रा को नियमित ग्रहण करने से रक्त अल्पता या अन्य बीमारियां कम ही होगी।

कृमि रोग – यदि खून की कमी के कारण को जांच की जाती है तो पहला कारण होता है कृमि रोग। छोटे बच्चों के नंगेपैर चलने खेलने के कारण पैर से कृमि शरीर में प्रवेश करता है जबकि बड़े छोटे सब उम्र के व्यक्तियों में कुछ कृमि खाद्य पदार्थ, विशेष कर सब्जी सलाद के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता तथा एक कृमि, फीताकृमि इसकी पैरासाइट कुछ समय मनुष्य में एवं कुछ समय सुअर के शरीर में रहता है इसलिए मांसाहारीयो को सुअर के मांस को पर्याप्त मात्रा में पका कर खाना चाहिए।

अधपका मांस से इंसान के शरीर में प्रवेश करता है कृमि – अधपका मांस खाने से कृमि रोग होता है हर स्थिति में कृमि मनुष्य के शरीर के अंतड़ी में पहुंचता है। बड़ा होता है, अपनी संख्या बढ़ाता है।

शरीर में कृमि होने से नुकसान – जिंदा रहने के लिए कृमि मनुष्य के द्वारा ग्रहण किए पोषक तत्वों को ग्रहण करता है तथा मनुष्य का खून पीता है। इस कारण बच्चे या कोई भी उम्र के व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होता है। दूसरा, लड़कियों में माहवारी के कारण खून की कमी होती है। तीसरा सिकलसेल होने के कारण भी खून की कमी होती है। चौथा किसी भी प्रकार के लंबे समय तक बीमारी होने पर भी खून की कमी होता है। इन सभी स्थितियों में खून की कमी को पूरा करना हो तो हमें हर हाल में शरीर में आयरन तत्व की कमी को पूरा (सप्लीमेंट) करना होगा जैसे 6 माह से 5 वर्ष के बीच के बच्चों को आयरन की सिरप देना होता है जिसे 1-1 एमएल सप्ताह में दो बार देना होता है। दूसरी कैटिगरी में प्राइमरी स्कूल के बच्चों को जूनियर आयरन गोली (डब्ल्यूआईएफएस) जो पिंक कलर की होती है। इसे प्रति मंगलवार को नोडल शिक्षक के द्वारा मध्यान्ह भोजन के बाद खिलाया जाता है। आयरन गोली खिलाने के पानी अवश्य पीनी चाहिए।

सिकलसेल, टीबी, कुष्ठ रोग की दी जानकारी – खून की कमी, सिकलसेल के कारण होती है। यह एक आनुवंशिक बीमारी है आनुवंशिक बीमारी माता और पिता के डीएनए और आरएनए से संतान में होता है। सीएमएचओ के द्वारा माहवारी के समय बरते जाने वाले सावधानियों के बारे लड़कियों को अलग से कक्षा में समझाया गया। स्वास्थ्य की चर्चा में एनीमिया, रक्त अल्पता, खून की कमी के कारण, उसकी पहचान, लक्षण, शरीर पर खून की कमी के कारण पड़ने वाले प्रभाव जैसे खून की कमी होने पर आई क्यू कम से कम 10% की कमी हो जाना, बच्चों की शारीरिक एवं मानसिक विकास में कमी होना, बच्चों में सीखने, समझने की क्षमता में कमी का होना तथा बच्चों में एकाग्रता की कमी होना प्रमुख फैक्टर है। इसके कारण बच्चे बीमार रहते हैं। स्कूल में उपस्थिति कम होने से बच्चे का रिजल्ट प्रभावित होता है और अंत में जवाब प्राचार्य को देना होता है। इस अवसर पर टीबी, कुष्ठ जांच खोज अभियान के अंतर्गत टीबी और कुष्ठ के लक्षण को बताया गया। सभी बच्चों का परीक्षण किया गया। ऐसे किसी लक्षण का पता लगाने पर अपने मोहल्ला के मितानिन को अवगत करावे। वे जांच कराएंगे।

उक्त अवसर पर डॉक्टर निराला ने बच्चों को नेत्र संबंधी जानकारी दी, नेत्र को कैसे सुरक्षित रखें क्या उपाय करने चाहिए जानकारी देते हुए नेत्रदान की माता को बताया और परिवारजन तथा पलकों से इस विषय में जागरूकता फैलाने की बात कही।

तंबाकू उत्पाद का आदत छोड़ना आवश्यक – विद्यालय में उपस्थित सभी बच्चों ने प्रश्न के उत्तर में डॉक्टरों ने बताया कि, उनके घर परिवार में कोई न कोई सदस्य है जो तंबाखू का प्रयोग का प्रयोगधुआं सहित बीड़ी सिगरेट या धुआं रहित गुड़ाखू के रूप में लिया जा रहा है जो एक चिंताजनक स्थिति है। काउंसलिंग करके तंबाखू , बीड़ी सिगरेट, गुटखा छुड़ाने के लिए आवश्यक पहल जरूरी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय ने बताया कि छात्रों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से जिला चिकित्सा अधिकारी के द्वारा एक जागरूकता लाई जा रही है जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपके हमारे और बच्चों के लिए बहुत लाभप्रद है बहुत ही सराहनीय पहल है। मैं चाहूंगा बच्चे इन्हें सुनने के साथ-साथ ग्रहण करें इस पर पहल करें और मौसमी बीमारी से बचे, आज के इस दौर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रहना हमारा खुद का दायित्व होना चाहिए और जो स्वास्थ्य अधिकारियों ने आज जानकारी दी इसे अपने पालकों और आस पड़ोस में भी साझा करना है। आप सब बच्चे स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें।

इस दौरान प्राचार्य जे मिश्रा ने कहा कि ऐसी  जानकारी काफी शिक्षाप्रद है और सभी लोग व छात्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहेंगे।

शिक्षक के साथ सभी विद्यार्थियों ने अपना अनुभव भी बताया। इस अवसर पर उप प्राचार्य प्रीति अवस्थी, डॉ अरुण नायक, नीमा निर्मलकर, भोई सर चिकित्सा विभाग के अधिकारी और शिक्षण स्टाफ उपस्थित रहे।

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