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पॉवर सेंटर : मंत्रिमंडल विस्तार…लाक्षागृह… दो विपक्ष… जादुई
दरवाजा… आज है… विदाई पार्टी


आखिरकार वो ऐतिहासिक घड़ी आ ही गई, जब साय मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया. तीन नए चेहरे सरकार में शामिल हुए. एक चेहरा सामाजिक समीकरण के लिए चुना गया, एक चेहरा हाईकमान के आदेश पर आया और एक चेहरे ने सीधे बिजनेस क्लास की टिकट कटाकर सरकार में अपनी आपात लैंडिंग कराई. खैर, मीडिया की भीड़ में, जब सबसे पहले मंत्रियों के नामों का खुलासा किए जाने की वाहवाही लूटी जा रही हो, तब यह बताना जरूरी है कि लल्लूराम. काम ने 5 अगस्त की अपनी एक रिपोर्ट में यह बता दिया था कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले संभावित चेहरों की चर्चा में दो नए नाम जुड़ गए हैं. यह नाम थे गुरु खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल. गजेंद्र यादव के नाम का बुलबुला तो तब से बना हुआ था, जब से मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हुई थी. गुरु खुशवंत साहेब के लिए दिल्ली ने वीटो लगा दिया था. सुना है कि मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ इसलिए टलता रहा क्योंकि गुरू खुशवंत साहेब के नाम पर राज्य के नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी. मगर दिल्ली अड़ गया. कोई गुंजाइश नहीं रही. रही बात राजेश अग्रवाल की, तो यह कहा जा रहा है कि उन्होंने सरकार में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली है. सरकार में सरगुजा का पलड़ा पहले से ही भारी था. बावजूद इसके वजनदार राजेश अग्रवाल का भार मंत्रिमंडल पर डालने के लिए किसी तरह का राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यापारिक दबाव था. बहरहाल जैसे-तैसे मंत्रिमंडल पूरा हो गया. एक चुनौती खत्म हुई, अपार चुनौतियां सामने उठ खड़ी हुई. वैसे मंत्रिमंडल के इस विस्तार को देखें, तो यह वाकई लगता है कि राजनीति में कुर्सी पाने का मापदंड अब सिर्फ ‘योग्यता’ नहीं रह गई है.

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