गड्ढों से भरे जर्जर बिलासपुर मार्ग से आएंगे प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा

शासन भाजपा की, नपा अध्यक्ष कांग्रेस का आखिर विकास का रोड़ा कौन ?
सारंगढ़ नगरपालिका की घोर उपेक्षा: जर्जर सड़कें, उफनती नालियां और बंद बत्तियां…
बदहाली के आंसुओं पर रोने को मजबूर शहरवासी!
पूर्व नपा अध्यक्ष और दिग्गज बीजेपी नेताओं के घरों के सामने की हालत खराब
सारंगढ़ बिलाईगढ़ न्यूज/ सारंगढ़ को नगरपालिका का दर्जा मिले लंबा अरसा बीत चुका है, लेकिन बुनियादी नागरिक सुविधाओं के नाम पर आज भी शहर की जनता खुद को छला हुआ महसूस कर रही है। स्वच्छ भारत अभियान और विकास के बड़े-बड़े दावों की हवा निकलती जा रही है। सारंगढ़ नगरपालिका की कार्यशैली अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही है। शहर की सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं, नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं और शाम ढलते ही पूरा शहर अंधेरे के आगोश में समा जाता है। जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ने शहर की जनता को नरकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है।

जर्जर सड़कों पर जान लेवा सफर :- सारंगढ़ की जीवन रेखा मानी जाने वाली सड़कें आज बदहाली की दास्तान बयां कर रही हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं, जिनसे उड़ती धूल और गिट्टियां राहगीरों की जान की दुश्मन बनी हुई हैं।
तुर्की तालाब गार्डन से राजापारा मार्ग :- इस मार्ग की हालत इतनी खस्ता है कि दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
बैंक ऑफ बड़ौदा से मिलन चौक :- यह शहर का सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाका है, लेकिन सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि रोजाना घंटों जाम की स्थिति निर्मित होती है और जल भराव की समस्या बनी रहती है।
बैंक ऑफ बड़ौदा से नगरपालिका कार्यालय मार्ग:- सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक बात तो यह है कि जिस मार्ग पर खुद नगरपालिका का कार्यालय स्थित है, वही सड़क बदहाली का शिकार है। जब अधिकारी अपने दफ्तर के बाहर की सड़क नहीं सुधार पा रहे, तो पूरे शहर की क्या परवाह करेंगे?
नगर पालिका कार्यालय मार्ग में जिपं अध्यक्ष के निवास नाली में भरा पानी – उक्त मार्ग में प्रशासनिक अधिकारियों के घरों के साथ सारंगढ़ स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पांडे जी का निवास है। साथ ही नगर पालिका स्कूल के बाहर से अध्यक्ष के निवास तक की नालियां बंद पड़ी है बजबजा रही है। घरों में सांप बिच्छू कीड़े मकोड़े निकल रहे हैं रहवासियों को जान का खतरा है। बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों के गुहार के बाद भी नगर पालिका के अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।
बिलासपुर मार्ग :- मुख्य हाईवे से जोड़ने वाले इस रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, लेकिन सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, यह पहचानना मुश्किल हो गया है। बारिश के दिनों में ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
बिलासपुर मार्ग में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिला भाजपा मंत्री कई भाजपा नेताओं, ठेकेदारों के घर मगर प्रशासन के आगे सब मत मस्तक – बिलासपुर मार्ग की जर्जरता और गड्ढों से बड़े सड़क के सामने ही पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अमित अग्रवाल भाजपा के जिला मंत्री निखिल केशरवानी और नगर पालिका के कई ठेकेदारों के घर के सामने की हालत ऐसी है तो सोचिए शहर का क्या आलम होगा ऐसा लगता है सब प्रशासन के आगे नतमस्तक है।
नाली सफाई ठप, महामारी का खतरा :- बदबू और मच्छरों के साये में जीने को मजबूर लोग –
शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है। नगरपालिका का स्वच्छता अमला केवल कागजों पर ही मुस्तैद नजर आता है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
पटी पड़ी नालियां – शहर के लगभग सभी वार्डों में नालियां कचरे, प्लास्टिक और मलबे से ठसाठस भरी पड़ी हैं। महीनों से नालियों की तलछट (सफाई) नहीं निकाली गई है।
सड़कों पर बहता गंदा नाली का पानी – नालियों का निकास बाधित होने के कारण गंदा और बदबूदार पानी सड़कों व लोगों के घरों के सामने बह रहा है। इससे न केवल पैदल चलना दुश्वार हो गया है, बल्कि भयानक दुर्गंध से सांस लेना भी भारी पड़ रहा है।
बीमारियों का बढ़ता ग्राफ :- ठहरे हुए गंदे पानी में मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। शहर के अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य और सफाई विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।
स्ट्रीट लाइटें बंद, अंधेरे में डूबा सारंगढ़ :- सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल-
सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये का बजट ठिकाने लगाने वाली नगरपालिका की पोल रात होते ही खुल जाती है।
अंधेरे में डूबे मुख्य चौराहे :- शहर के अधिकांश पोल पर लगी रोड लाइटें या तो महीनों से खराब पड़ी हैं या उन्हें जानबूझकर बंद रखा जाता है। शाम ढलते ही मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी गलियों तक सन्नाटा और घना अंधेरा पसर जाता है।
बढ़ते अपराध का डर – अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व, नशेड़ी और चोर सक्रिय हो रहे हैं। रात के समय महिलाओं, बेटियों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है।
हादसों में बढ़ोतरी – स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण चालकों को सड़क के गड्ढे और आवारा मवेशी दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन रात के समय गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं।
जनता का फूटा गुस्सा
नगरपालिका की इस घोर अनदेखी से आक्रोशित शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि वे कई बार लिखित ज्ञापन देकर अधिकारियों को जगाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन नगरपालिका प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।




