निर्माता का ही आशियाना हुआ खस्ताहाल

सारंगढ़ में आरईएस विभाग का कार्यालय बना खंभा-खंडहर, मरम्मत की दरकार
सारंगढ़ न्यूज़। जो विभाग पूरे जिले के ग्रामीण अंचलों में पंचायतों के निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, सत्यापन, मूल्यांकन और देखरेख का जिम्मा उठाता है, आज वही ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग खुद अपने खस्ताहाल आशियाने में बैठने को मजबूर है। सारंगढ़ जिला मुख्यालय स्थित आरईएस विभाग का कार्यालय और अधिकारियों के कक्ष दिन-प्रतिदिन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। विभागीय अनदेखी के चलते बदहाली के आंसू बहा रहे इस भवन की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जानकारी के अनुसार, मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2011-12 में लगभग 10 से 15 लाख रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन सूत्रों की मानें तो निर्माण के महज एक-दो वर्षों के भीतर ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे और कमरे की हालत बिगड़ने लगी थी। वर्तमान में इसी जीर्ण-शीर्ण भवन में आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) बैठते हैं, जबकि पास के ही हॉल में एसडीओ, लगभग आधा दर्जन उप-अभियंता और मनरेगा विभाग के एक दर्जन से अधिक उप-अभियंता एक साथ विभागीय कामकाज निपटाते हैं।
विडंबना यह है कि जो विभाग खुद निर्माण कार्यों की तकनीकी बारीकियों को परखता है, उसी का दफ्तर आज घटिया निर्माण या रख-रखाव के अभाव की भेंट चढ़ चुका है। जिला मुख्यालय में स्थित कार्यालयों का स्वच्छ, सुव्यवस्थित और बैठने योग्य होना आवश्यक है ताकि वहां आने-माने ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और हितग्राही आसानी से अपनी समस्याओं को लेकर पहुंच सकें। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस ओर संज्ञान लेकर आरईएस कार्यालय की मरम्मत कराएगा या अधिकारी यूं ही खतरे के साये में बैठने को मजबूर रहेंगे।




