मां वैष्णवी संगीत महावि सारंगढ़ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव संपन्न

सुर, ताल और नृत्य की त्रिवेणी से सराबोर हुए श्रोता
सारंगढ़ न्यूज़/ सारंगढ़ स्थित मां वैष्णवी संगीत महाविद्यालय (रानी सागर) में 29 और 30 जुलाई 2026 को ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया।
महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं ने सर्वप्रथम मां सरस्वती और अपने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। दो दिनों तक चले इस सांस्कृतिक अनुष्ठान में शास्त्रीय गायन, तबला वादन और कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।

प्रथम दिवस (29 जुलाई, बुधवार):- शास्त्रीय गायन एवं तबला वादन की सरगम
कार्यक्रम के पहले दिन शास्त्रीय गायन एवं तबला वादन के विद्यार्थियों ने विभिन्न रागों की प्रस्तुति से समां बांध दिया:
शास्त्रीय गायन प्रस्तुतियां:
अवधेश तिवारी (वरिष्ठ शिष्य, संगीत विशारद): राग सोहनी (रूपक ताल) में “दीप पूजा का बुझा मत, मान जा चंचल हवा” एवं राग दरबारी में भावपूर्ण “गुरु वंदना”।
जसपाल रत्नाकर: राग दुर्गा में “देवी दुर्गे दयानी दया करो”\।
सुयश तिवारी: राग बिहाग में “कान्हा जा रे जा” एवं राग खमाज (एक ताल) में “मन में बसी मूरत तोरि”\।
सौम्या देवांगन: राग बिहाग में “कान्हा जा रे जा”\।
कुंज बिहारी गहरे: तीन ताल में “मधुर धुन बजी बजी रे कीत”\।
केशव साहू: राग बिहाग में “क्यों तुम रूठ गए मनमोहन”\।
उत्तम बरेठ: राग सोहनी में “बजी बांसुरी श्याम सुंदर की”\।
नवसागर चौधरी: राग दरबारी में “अब क्या सोचे मन मेरा”\।
कृषि टंडन: राग भूपाली में “जाऊं तोहरे चरण कमल पर वरी”\।
मुकुंद दास महंत: राग मालकोश में “चरण रज गुरु के सीर धरिए” (गुरु वंदना)।
प्रकाश केवट: राग यमन में “मधुर बजाए श्याम मुरलिया”\।
मुकेश सिंह ठाकुर: राग खमाज में “नमन करूं मैं सतगुरु चरणा” (गुरु वंदना)।
तबला स्वतंत्र वादन एवं संगत:-
स्वतंत्र वादन (तीन ताल): लम्बोदर वैष्णव, मनोज मैत्री, निर्मल भारती, शाश्वत यादव, अमरदीप कुर्रे, उत्तम बरेठ, नवसागर चौधरी एवं मुकुंद दास ने जुगलबंदी में उठान, कायदे, टुकड़े और परन का आकर्षक प्रदर्शन किया।
गायन संगत:- उत्तम बरेठ, लम्बोदर दास एवं नवसागर चौधरी ने तबले पर कुशल संगति की।
द्वितीय दिवस (30 जुलाई, गुरुवार):- कथक नृत्य की भव्य प्रस्तुति
दूसरे दिन कथक ग्रुप की छात्राओं ने मां सरस्वती पूजन के उपरांत गुरु वंदना से नृत्य संध्या की शुरुआत की।
विशेष प्रस्तुतियां: छात्राओं ने कथक के ठाट, तोड़े, टुकड़े, आमद, चक्रदार परन, गत भाव और तत्कार का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतिभागी छात्राएं: आद्या द्विवेदी, गीतिका साहू, गौरांगी पटवा, सानिया पटेल, अपेक्षा केसरवानी, अनुषा केशवानी, निधि सिंह एवं कृति केशवानी।
प्राचार्य का मार्गदर्शन एवं समापन :-
कार्यक्रम के समापन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य एल. डी. वैष्णव ने स्वयं अपनी गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने राग मेघ मल्हार (तीन ताल) में “गरजत घन न न घोर घोर” तथा राग मियां मल्हार (एक ताल) में “अति झूम झूम झूम रे, आयो बदरवा उत” की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर तबले के सभी छात्रों ने एक साथ संगति की।
प्राचार्य जी ने “अनभ्यासे विषं विद्या” (बिना अभ्यास के विद्या विष के समान हो जाती है) का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को निरंतर रियाज करने की प्रेरणा दी। उन्होंने लुप्त हो रही शास्त्रीय संगीत की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया और सभी छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।




