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कर्तव्यनिष्ठा की पहचान: चार दशक बाद सम्मानपूर्वक रिटायर हुए एकादश कुर्रे!

सेवा, समर्पण और ईमानदारी का अंत नहीं—कुर्रे बने मिसाल!

सारंगढ़।कुछ विदाइयाँ सिर्फ औपचारिक नहीं होतीं, वे इतिहास बन जाती है, ऐसी ही एक भावुक और गौरवपूर्ण विदाई के साक्षी बना पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जब 42 वर्षों तक खाकी की गरिमा को अपने कर्म और ईमानदारी से ऊंचा रखने वाले प्रधान आरक्षक एकादश कुर्रे से विभाग ने नम आंखों से विदा ली।
चार दशक से भी अधिक समय तक श्री कुर्रे ने अपने कर्तव्यों को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उन्हें जिया। कठिन परिस्थितियों, बदलते दौर और बढ़ती चुनौतियों के बीच उन्होंने हमेशा कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और ईमानदारी को अपनी पहचान बनाए रखा। इस गरिमामय अवसर पर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय ने उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया और कहा कि “एकादश कुर्रे जैसे कर्मयोगी पुलिसकर्मी विभाग की असली पूंजी होते हैं। उनकी सेवा, समर्पण और सादगी आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है।” समारोह में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पाण्डेय, एसडीओपी स्नेहिल साहू, रक्षित निरीक्षक जितेंद्र कुमार चंद्रा सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। हर चेहरे पर सम्मान था, और हर आंख में एक अनुभवी साथी को विदा करने की भावुकता झलक रही थी।
अपने विदाई संबोधन में श्री कुर्रे ने कहा कि “समय के साथ पुलिसिंग के तरीके बदले, तकनीक आई, चुनौतियां बढ़ी लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली—वर्दी के प्रति मेरा सम्मान और कर्तव्य के प्रति मेरी निष्ठा।” उन्होंने अपने सेवाकाल के यादगार पलों को साझा करते हुए विभाग, वरिष्ठ अधिकारियों और साथियों के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर उपस्थित उनके परिवारजनों की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी—यह सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि एक गौरवपूर्ण सफर का सम्मान था।
यह समारोह एक संदेश भी दे गया—कि सच्ची सेवा कभी समाप्त नहीं होती, वह प्रेरणा बनकर आने वाली पीढ़ियों में जीवित रहती है।

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